जिस्म पर सिकतीं रोटियां ।
नारी है इज्जत करो, नारी
देवी समान होती है और देवी अर्थात भगवान, जो अमूल्य है जिनका कोई मूल्य नही । अपने
जीवन में हम यह अनमोल शब्द कई दफा सुनते है कभी अपने माता पिता से , कभी शिक्षक से
तो कभी हमारे देश के कथित निर्माण पुरुषो से । लेकिन कहते है कथन से बहुत अलग होती
उसकी सच्चाई और इस देश के कोने कोने में नारी की वर्तमान स्थिती की तरह उससे
संबंधित इन अमूल्य कथनो के कपड़े उतरते हुए हम अपनी शर्मिंदगी और उत्तेजना से
परिर्पूण चक्षु से देख सकते है ।
भारत देश हमेशा से नारी और
उसके सम्मान की वकालत करता आया है लेकिन पिछले कुछ वर्षो से शायद भारत देश अपने उन
कथनो को खुद पर लागू करना भूल गया है और इस का परिणाम और प्रमाणिकता है देश में स्थापित वैश्यावृत्ती । जिसकी दुकान इस
देश में बड़ी तेजी से फल फूल रही है । और इन में से कुछ दुकाने जो आज भारत का इस
वैश्यवृत्ती के बाजार में परचम लहरा रही है वह लाइसेंसी है । अर्थात यह भारत सरकार
से मान्यता प्राप्त है ।
हम एक तरफ तो नारी के
सम्मान की वकालत करते है और उसे देवी का दर्जा दे रहे है और दूसरी तरफ हम महज चंद
कागज के टुकड़ो में तोल कर उसे बेच रहे है । आखिर यह किस तरह कि नीती है सरकार कि
जो एक तरफ तो नारी देवी है का नारा लगा रही है और दूसरी तरफ यह दिखा रही है कि
भगवान चाहे मूर्तियो में हो या फिर
वास्तविकता में उसकी कीमत 250 , 300 या फिर 1000 ही है ।
आज इन रंगीन अंधेरी दुकानो
में हजारो की संख्या में नारियां है । इस रंगीन अधेंरी गलियों में इन देवियों को
जबरदस्ती और बहला फुसला कर लाया जा जाता ।
क्योंकी जिन स्त्रियों को यहां लाया जाता है वह ज्यादातर गांवों के गरीब घर से होती है इनहे वहाँ से यह कहके
लाया जाता है कि शहर में उनकी नौकरी लगवायी जाएगी और उन्हे तनखवा मिलेगी जिससे वह
अपना और घर वालो का लालन पोषण कर पायेगी। और इन बातो में फंसाकर उसे शहर की बड़ी
इमारतो और चकांचौध से दूर हवस की भट्टी में लाकर झोंक दिया जाता है जहाँ उसे
तनख्वा तो मिलती है पर तन की। यानी सीधे तौर पर उसका शोषण हो रहा है। तो आखिर
क्यों हमारी सरकार इस वासत्विकता से अनजान न होकर इन स्त्री शोषणखानो को लाइसेंस
दिया है । क्या वह भूल गयी है कि नारी देवी के समान होती है ?
सवाल दोबरा से वही खड़ा
होता है की आखिर क्यों भारत सरकार ने इन वैश्यलयों को लाइसेंस देकर लीगल कर दिया
है । क्या सरकार इस बात से अनजान हैं कि उनकी इस नीती या उनके इस कदम के वजह से
भारत में ह्यूमन ट्रेफिकिंग का जाल पनप रहा है। सवालों के कटघरे में खाली सरकार ही
नहीं बल्की पढे लिखे बच्चे और अमीर भी आते
हैं जिनकी अंग्रेजी और लंबी महंगी गाडिंया हर दिन हर रात इस अंधेरी गली की शोभा
बढ़ाते है और नैतिकता और अपने दायित्वो की धज्जियां उड़ाते है। आखिर क्या वजह है
कि वैश्यालय नाम का दलदल इस देश में पनप रहा है जिसे हम पाटने की बजाय हर दिन और
गहरा करते जा रहै हैं जिसमें रोजाना न जाने कितनी देवियां दम तोड़ रही है और जिस्म
पर सिकती रोटियां तोड़ने को मजबूर है ।
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